Dost Ko Dushman Sad Shayari
इज़हार-ए-इश्क़ उस से न करना था ‘शेफ्ता’, ये क्या किया की दोस्त को दुश्मन बना दिया।– शेफ्ता मुस्तफा खान
इज़हार-ए-इश्क़ उस से न करना था ‘शेफ्ता’, ये क्या किया की दोस्त को दुश्मन बना दिया।– शेफ्ता मुस्तफा खान
इसी शहर में कईं साल से मेरे कुछ क़रीबी दोस्त हैं, उन्हें मेरी कोई खबर नहीं, मुझे उन का कोई पाता नहीं।– बशीर बद्र
इस से पहले की बेवफा हो जाएँ, क्यों न ऐ दोस्त हम जुदा हो जाएँ।– अहमद फ़राज़
दिल अभी पूरी तरह टूटा नहीं, थोड़ी दोस्तों की और मेहरबानी चाहिए।– हामिद आदम
ऐ दोस्त हम ने तर्क़-ए-मोहब्बत के बावजूद, महसूस की है तेरी ज़रूरत कभी-कभी।– नासिर काज़मी
आ की तुझ बिन इस तरह ऐ दोस्त घबराता हूँ मैं, जैसे हर शै में किसी शै की कमी पाता हूँ मैं।– जिगर मोरादाबादी
मुझे दुश्मन से अपने इश्क़ सा है, मैं तन्हा आदमी की दोस्ती हूँ।– बक़र मेहदी
मुझे दोस्त कहने वाले ज़रा दोस्ती निभा दे, ये मुतालबा है हक़ का कोई इल्तिज़ा नहीं है।– शकील बदायुनी
मोहब्बत में दिखावे की दोस्ती न मिला, अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी न मिला।– बशीर बद्र
मेरे हम-नफ़स मेरे हम-नवा मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे, मैं हूँ दर्द-ए-इश्क़ से जान-बा-लब मुझे ज़िन्दगी की दुआ न दे।– सकील बदायुनी