Mitti Independence Day Shayari
यक़ीन हो, के ना हो, बात तो यक़ीन की है, हमारे जिस्म की मिट्टी, इसी ज़मीन की है।– राहत इंदौरी
यक़ीन हो, के ना हो, बात तो यक़ीन की है, हमारे जिस्म की मिट्टी, इसी ज़मीन की है।– राहत इंदौरी
हम अपने खून से लिक्खें कहानी ऐ वतन मेरे, करें कुर्बान हँस कर ये जवानी ऐ वतन मेरे।दिली ख्वाहिश नहीं कोई मगर ये इल्तिजा बस है…
दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त, मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी।Happy Independence Day
जो कामयाबी है उसकी खुशी तो पूरी है, मगर यह याद भी रखना बहुत जरूरी है।की दास्तां अभी हमारी अधूरी है, बहुत हुआ है मगर, फिर भी यह कमी तो है।बहुत से होठों पर मुस्कान आ गई लेकिन, बहुत सी…
मोहब्बत मुझे छोड़ गयी, नफरत ने संभाल लिया, दोस्ती तेरी जरुरत नहीं मुझे दुश्मनों ने पाल लिया।
कभी इतराती तो कभी जुल्फों को बिखराती है, ज़िदगी शाम है, और शाम ढली जाती है।
वो पानी की बूँद थी जो आँख से बही थी, आंसू तो वो था, जो आखों में रुक गया, उसने बस तड़प सही थी।Voh Paani Ki Boond Thi Jo Aankh Se Bahi Thi Aansu To Voh Tha, Jo Aakhon Mein…
तंग आ चुके हैं कश्मकश-ए-ज़िन्दगी से हम, ठुकरा न दें जहान को को कहीं बे-दिली से हम।– साहिर लुधियानवी
बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं, तुझे ए ज़िन्दगी हम दूर से पहचान लेते हैं।
अब भी इक उम्र पे जीने का न अंदाज़ आया, ज़िन्दगी छोड़ दे पीछा मेरा मैं बाज़ आया।