Aakhon Mein Aansu
“हम रहेंगे खुश तेरे बिना भी।”ये लिखने के लिए कलम उठाई,रुक न पाए आखों में दबे आंसू,और कम्बख़त कलम से पहले चल पड़े।
“हम रहेंगे खुश तेरे बिना भी।”ये लिखने के लिए कलम उठाई,रुक न पाए आखों में दबे आंसू,और कम्बख़त कलम से पहले चल पड़े।
Change हो जाओ Time के साथ-साथ,और मजबूरियों का रंडी-रोना छोड़ दो,हर एक को अपने हिसाब से ढाल नहीं सकते,बस अपना खुद का Time और वजूद बदलना सीखो।
तेरे बिना जीना सीख तो लिया है अब,पर तुझको भुला पायूँगा, लेकिन कब?
कहाँ कोई ऐसा मिला जिस पर हम दुनिया लुटा देते, हर एक ने धोखा दिया, किस-किस को भुला देते, अपने दिल का ज़ख्म दिल में ही दबाये रखा,बयां करते तो महफ़िल को रुला देते।
न वो सपना देखो जो टूट जाये,न वो हाथ थामो जो छूट जाये, मत आने दो किसी को करीब इतना, कि उसके दूर जाने से इंसान खुद से रूठ जाये।
कांटो सी चुभती है तन्हाई,अंगारों सी सुलगती है तन्हाई,कोई आ कर हम दोनों को ज़रा हँसा दे,मैं रोता हूँ तो रोने लगती है तन्हाई।
वो करीब ही न आये तो इज़हार क्या करते, खुद बने निशाना तो शिकार क्या करते, मर गए पर खुली रखी आँखें, इससे ज्यादा किसी का इंतजार क्या करते।
अनजाने में यूँ ही हम दिल गँवा बैठे, इस प्यार में कैसे धोखा खा बैठे, उनसे क्या गिला करें, भूल तो हमारी थी, जो बिना दिल वालों से ही दिल लगा बैठे।
न जाने क्यों हमें आँसू बहाना नहीं आता,न जाने क्यों हाल-ऐ-दिल बताना नहीं आता,क्यों सब दोस्त बिछड़ गए हमसे,शायद हमें ही साथ निभाना नहीं आता
वो नाराज़ हैं हमसे कि हम कुछ लिखते नहीं, कहाँ से लाएं लफ्ज़ जब हमको मिलते नहीं, दर्द की ज़ुबान होती तो बता देते शायद, वो ज़ख्म कैसे दिखाए जो दिखते नहीं।