तेरे बिना जीना
तेरे बिना जीना सीख तो लिया है अब,पर तुझको भुला पायूँगा, लेकिन कब?
तेरे बिना जीना सीख तो लिया है अब,पर तुझको भुला पायूँगा, लेकिन कब?
Mere Baare Mein Apni Soch Ko Thoda Badalkar Dekh, Mujhse Bhi Burey Hain Log, Tu Ghar Se Nikalkar to Dekh …
किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल, कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा।– Ahmad Faraz
अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जाएँगे, मर के भी चैन न पाया तो किधर जाएँगे।
मोहब्बत मुझे छोड़ गयी, नफरत ने संभाल लिया, दोस्ती तेरी जरुरत नहीं मुझे दुश्मनों ने पाल लिया।
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी, सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा।
अब समझ लेते हैं मीठे लफ़्ज़ की कड़वाहटें, हो गया है ज़िंदगी का तजुर्बा थोड़ा बहुत।
चाहता हूँ कि भूल जाऊँ तुम्हें, और ख़ुद भी न याद आऊँ तुम्हें!
ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया। जाने क्यूँ आज तेरे नाम पे रोना आया। – शकील बदायुनीना कर मुझसे बेईम्तिहा मोहब्बत तू।। गर दो घुट शराब के बाद बेवफ़ाई करनी है।। – सविता निकमVoh Nafrat Ki Vajah Dhundhta Raha,…