Classic Dosti Shayari
ज़िद हर इक बात पर नहीं अच्छी, दोस्त की दोस्त मान लेते हैं।– दाग़ देहलवी
ज़िद हर इक बात पर नहीं अच्छी, दोस्त की दोस्त मान लेते हैं।– दाग़ देहलवी
वो कोई दोस्त था अच्छे दिनों का, जो पिछली रात से याद आ रहा है।– नाशिर काज़मी
शर्तें लगाई जाती नहीं दोस्ती के साथ, कीजिये मुझे क़ुबूल मेरी हर कमी के साथ।– वसीम बरेलवी
मेरा ज़मीर बहुत है मुझे सजा के लिए, तू दोस्त है तो नसीहत न कर खुदा के लिए।– शाज़ तम्कनत
कौन रोता है किसी और की खातिर ऐ दोस्त, सब को अपनी ही किसी बात पे रोना आया।– साहिर लुधयानवी
इज़हार-ए-इश्क़ उस से न करना था ‘शेफ्ता’, ये क्या किया की दोस्त को दुश्मन बना दिया।– शेफ्ता मुस्तफा खान
इसी शहर में कईं साल से मेरे कुछ क़रीबी दोस्त हैं, उन्हें मेरी कोई खबर नहीं, मुझे उन का कोई पाता नहीं।– बशीर बद्र
दिल अभी पूरी तरह टूटा नहीं, थोड़ी दोस्तों की और मेहरबानी चाहिए।– हामिद आदम
ऐ दोस्त हम ने तर्क़-ए-मोहब्बत के बावजूद, महसूस की है तेरी ज़रूरत कभी-कभी।– नासिर काज़मी
आ की तुझ बिन इस तरह ऐ दोस्त घबराता हूँ मैं, जैसे हर शै में किसी शै की कमी पाता हूँ मैं।– जिगर मोरादाबादी