Vo Kareeb Hi Naa Aaye
वो करीब ही न आये तो इज़हार क्या करते, खुद बने निशाना तो शिकार क्या करते, मर गए पर खुली रखी आँखें, इससे ज्यादा किसी का इंतजार क्या करते।
वो करीब ही न आये तो इज़हार क्या करते, खुद बने निशाना तो शिकार क्या करते, मर गए पर खुली रखी आँखें, इससे ज्यादा किसी का इंतजार क्या करते।
अनजाने में यूँ ही हम दिल गँवा बैठे, इस प्यार में कैसे धोखा खा बैठे, उनसे क्या गिला करें, भूल तो हमारी थी, जो बिना दिल वालों से ही दिल लगा बैठे।
न जाने क्यों हमें आँसू बहाना नहीं आता,न जाने क्यों हाल-ऐ-दिल बताना नहीं आता,क्यों सब दोस्त बिछड़ गए हमसे,शायद हमें ही साथ निभाना नहीं आता
वो नाराज़ हैं हमसे कि हम कुछ लिखते नहीं, कहाँ से लाएं लफ्ज़ जब हमको मिलते नहीं, दर्द की ज़ुबान होती तो बता देते शायद, वो ज़ख्म कैसे दिखाए जो दिखते नहीं।
दिल मेरा जो अगर रोया न होता, हमने भी आँखों को भिगोया न होता, दो पल की हँसी में छुपा लेता ग़मों को, ख़्वाब की हक़ीक़त को जो संजोया नहीं होता!
रोने की सज़ा न रुलाने की सज़ा है, ये दर्द मोहब्बत को निभाने की सज़ा है, हँसते हैं तो आँखों से निकल आते हैं आँसू, ये उस शख्स से दिल लगाने की सज़ा है।
हम उम्मीदों की दुनियां बसाते रहे, वो भी पल पल हमें आजमाते रहे, जब मोहब्बत में मरने का वक्त आया, हम मर गए और वो मुस्कुराते रहे।
तेरी आरज़ू मेरा ख्वाब है, जिसका रास्ता बहुत खराब है, मेरे ज़ख्म का अंदाज़ा न लगा, दिल का हर पन्ना दर्द की किताब है।
जो नजर से गुजर जाया करते हैं, वो सितारे अक्सर टूट जाया करते हैं, कुछ लोग दर्द को बयां नहीं होने देते, बस चुपचाप बिखर जाया करते हैं।
दिन बीत जाते है सुहानी यादें बनकर, बाते रह जाती है कहानी बनकर, पर दोस्त तो हमेशा दिल के करीब रहते है, कभी मुस्कान तो कभी, आँखों का पानी बनकर।