Maa Ka Pyar Shayari
Syahi Khatm Ho Gyi “Maa” Likhte-Likhte, Uske Pyar Ki Daastaan Itni Lambi Thi …
Syahi Khatm Ho Gyi “Maa” Likhte-Likhte, Uske Pyar Ki Daastaan Itni Lambi Thi …
Jannat Ka Har Lamha Deedar Kiya Tha, God Mein Uthakar Jab Maa Ne Pyar Kiya Tha …
Maa Kehti Thi Meri Jaan Hai Tu, Aur Beta Kisi Aur Ko Zindagi Maan Baitha …
घर आ कर बहुत रोये माँ-बाप अकेले में, मिट्टी के खिलोने भी सस्ते नहीं थे मेले में।
रात भर मैंने ख्वाबों में जन्नत की सैर की, जब सुबह उठा तो मेरा सर माँ की गोद में था।
लबों पर उसके कभी बद-दुआ नहीं होती, बस एक माँ है जो कभी खफा नहीं होती।
सबने कहा, अच्छे से जाना, और माँ ने कहा, बेटा जल्दी आना।
ठोकर न मार मुझे पत्थर नहीं हूँ मैं, हैरत से न देख मुझे मंज़र नहीं हूँ मैं।तेरी नज़रों में मेरी क़दर कुछ भी नहीं, मगर मेरी माँ से पूछ उसके लिए क्या नहीं हूँ मैं?