Crying Maa Baap Shayari
घर आ कर बहुत रोये माँ-बाप अकेले में, मिट्टी के खिलोने भी सस्ते नहीं थे मेले में।
घर आ कर बहुत रोये माँ-बाप अकेले में, मिट्टी के खिलोने भी सस्ते नहीं थे मेले में।
रात भर मैंने ख्वाबों में जन्नत की सैर की, जब सुबह उठा तो मेरा सर माँ की गोद में था।
लबों पर उसके कभी बद-दुआ नहीं होती, बस एक माँ है जो कभी खफा नहीं होती।
अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जाएँगे, मर के भी चैन न पाया तो किधर जाएँगे।
सबने कहा, अच्छे से जाना, और माँ ने कहा, बेटा जल्दी आना।
मुझ को ख़ुशियाँ न सही ग़म की कहानी दे दे, जिस को मैं भूल न पाऊँ वो निशानी दे दे।
बारिश में पुरानी मिट्टी की दीवारें, कुछ ऐसे टूट कर बिखर जातें हैं वो लोग, जो खुद से भी ज्यादा किसी और से प्यार करते हैं।
Apni Nazron Ke Teer Mujh Per Yoon Na Chalaaya Karo Aise Na Muskura Kar Mujh Ko Apna Deewana Banaaya KaroHosh Kho Deta Hun, Main Tumhare Khyaalon Mein Aise Na Madhosh Ho Kar Mujhe Seene Se Lagaaya Karo …
जी चाहे की दुनिया की हर एक फ़िक्र भुला कर, दिल की बातें सुनाऊँ तुझे मैं पास बिठा कर!दूर कहीं जहां कोई न हो हमारे अलावा, टूट कर प्यार करूँ मैं तुम्हें सीने से लगा कर।
तुम हसीन हो, गुलाब जैसी हो, बहुत नाज़ुक हो ख्वाब जैसी हो,होठों से लगाकर पी जायूँ तुम्हें, सर से लेकर पाँव तक शराब जैसी हो।